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जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ दूसरा दिन: सब्सक्रिप्शन करीब 3.5 गुना, खुदरा हिस्सा पूरी तरह भरा
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जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ दूसरा दिन: सब्सक्रिप्शन करीब 3.5 गुना, खुदरा हिस्सा पूरी तरह भरा

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भारत के दूरसंचार और डिजिटल सेवा बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स की स्थिति के कारण इस पेशकश ने संस्थागत और व्यक्तिगत, दोनों निवेशकों का ध्यान खींचा है।

जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ दूसरा दिन: सब्सक्रिप्शन करीब 3.5 गुना, खुदरा हिस्सा पूरी तरह भरा

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को 22 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक बोली के दूसरे दिन भी निवेशकों की जोरदार दिलचस्पी मिलती रही। रिपोर्ट किए गए बाजार आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का 30,213 करोड़ रुपये का आईपीओ सुबह 11 बजे तक कुल 3.48 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। खुदरा निवेशक श्रेणी 1.03 गुना सब्सक्राइब हुई, जो संकेत देता है कि रिपोर्टिंग के समय तक मांग इस श्रेणी के लिए आरक्षित शेयरों की संख्या से ज्यादा हो चुकी थी।

भारत के दूरसंचार और डिजिटल सेवा बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स की स्थिति के कारण इस पेशकश ने संस्थागत और व्यक्तिगत, दोनों निवेशकों का ध्यान खींचा है। कंपनी को रिलायंस इंडस्ट्रीज का समर्थन हासिल है और वह शेयर बाजार में एक बड़ी लिस्टिंग की तैयारी कर रही है।

खुदरा निवेशकों की भागीदारी

बोली के दूसरे दिन खुदरा भागीदारी मजबूत हुई। एचडीएफसी स्काई द्वारा रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, 22 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक खुदरा श्रेणी लगभग 1.03 गुना सब्सक्राइब हो चुकी थी। इसका मतलब है कि उस समय आवेदन किए गए शेयरों की संख्या खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित मात्रा से थोड़ी ज्यादा थी।

बोली अवधि के दौरान खुदरा सब्सक्रिप्शन के आंकड़े बदल सकते हैं, क्योंकि निवेशक आवेदन जमा करते हैं, उनमें बदलाव करते हैं या जहां अनुमति हो वहां उन्हें वापस लेते हैं। इसलिए अंतिम सब्सक्रिप्शन स्तर इश्यू बंद होने के बाद तय होगा।

खुदरा प्रतिक्रिया आईपीओ की कुल मांग का केवल एक हिस्सा है। मांग अलग-अलग श्रेणियों में कैसे बंटी है, यह समझने के लिए निवेशकों को योग्य संस्थागत खरीदारों, गैर-संस्थागत निवेशकों, कर्मचारियों और पात्र शेयरधारकों के सब्सक्रिप्शन आंकड़े भी देखने चाहिए।

संस्थागत निवेशक मांग में आगे

22 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों में योग्य संस्थागत खरीदारों ने मुख्य सार्वजनिक निवेशक श्रेणियों में सबसे मजबूत सब्सक्रिप्शन दर्ज किया। एंकर निवेशकों को छोड़कर उनका हिस्सा 9.42 गुना सब्सक्राइब हुआ। गैर-संस्थागत निवेशक श्रेणी 2.34 गुना सब्सक्राइब हुई, जबकि खुदरा हिस्सा 1.03 गुना तक पहुंचा।

किसी बड़ी सार्वजनिक पेशकश के लिए संस्थागत मांग अहम होती है, क्योंकि वह पात्र वित्तीय संस्थानों और अन्य योग्य निवेशकों के आवेदनों के स्तर की जानकारी देती है। हालांकि, ऊंचा सब्सक्रिप्शन गुणक इस बात की गारंटी नहीं है कि शेयर लिस्टिंग के बाद मुनाफा देगा।

ये आंकड़े समय-विशेष के हैं और उसी दिन बाद में जारी अपडेट से अलग हो सकते हैं। बोली प्रक्रिया बंद होने के बाद अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों की पुष्टि एक्सचेंज के ताज़ा आंकड़ों से करनी चाहिए।

एंकर बुक को 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की मांग

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सार्वजनिक इश्यू खुलने से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स की एंकर निवेशक बुक को 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बोलियां मिलीं। एंकर बुक का आवंटन इससे काफी छोटा था, जिसमें कंपनी ने 212 एंकर निवेशकों को 1,119 रुपये प्रति शेयर के भाव पर लगभग 8,110 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए।

एंकर निवेशक वे संस्थागत निवेशक होते हैं जिन्हें लागू नियमों के अधीन सार्वजनिक बोली अवधि से पहले आवंटन मिलता है। उनकी भागीदारी सार्वजनिक इश्यू के लिए बताए गए सब्सक्रिप्शन आंकड़ों से अलग है।

एंकर बुक के लिए रिपोर्ट की गई मांग में घरेलू म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, वैश्विक एसेट मैनेजर और सॉवरेन वेल्थ फंड की दिलचस्पी शामिल थी। ये निवेशक अलग-अलग निवेश रणनीतियों और जोखिम आकलन के तहत भाग लेते हैं।

मजबूत एंकर मांग ने आईपीओ को लेकर बने आकर्षण में योगदान दिया है, लेकिन एंकर आवंटन को लिस्टिंग के प्रदर्शन या भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ का ब्योरा

रिपोर्ट किए गए पेशकश ब्योरे के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स का सार्वजनिक इश्यू लगभग 30,213 करोड़ रुपये का है। प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर है, और यह इश्यू 21 अक्टूबर को सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला। बोली अवधि 23 अक्टूबर 2026 को बंद होनी है।

उम्मीद है कि यह आईपीओ भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक पेशकशों में से एक होगा। प्रस्तावित लिस्टिंग 28 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है, जो इश्यू की समय-सारिणी और लागू प्रक्रियाओं के अधीन है।

निवेशकों को अंतिम इश्यू संरचना, कीमत, पात्रता शर्तों, आवेदन प्रक्रिया और आवंटन कार्यक्रम के लिए आधिकारिक ऑफर दस्तावेज देखने चाहिए। अंतिम तारीखों और ब्योरे की पुष्टि आधिकारिक एक्सचेंज घोषणाओं से की जानी चाहिए।

आईपीओ चर्चा में क्यों है

जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े डिजिटल और दूरसंचार कारोबार का संचालन करती है। उसके इकोसिस्टम में कनेक्टिविटी सेवाएं और डिजिटल पेशकशें शामिल हैं, और रॉयटर्स की रिपोर्टिंग के अनुसार उसका दूरसंचार कारोबार 50 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों को सेवा देता है।

कंपनी ने मोबाइल कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर होम ब्रॉडबैंड, क्लाउड सेवाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी पेशकशों तक अपना दायरा बढ़ाया है। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में उसके पैमाने और स्थिति ने इस आईपीओ को घरेलू प्राइमरी बाजार के लिए एक अहम घटना बना दिया है।

इस पेशकश पर विचार करने वाले निवेशक कंपनी की कारोबारी वृद्धि, वित्तीय प्रदर्शन, प्रतिस्पर्धी स्थिति, पूंजी जरूरतों और वैल्यूएशन का आकलन कर सकते हैं। उन्हें प्रतिस्पर्धा, प्रौद्योगिकी निवेश, नियमन और कंपनी की अपने दूरसंचार परिचालन पर निर्भरता से जुड़े जोखिमों पर भी विचार करना चाहिए।

निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए

आईपीओ 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा, और अधिक आवेदन जमा होने पर कुल सब्सक्रिप्शन गुणक बदल सकता है। अंतिम श्रेणीवार आंकड़े बताएंगे कि पूरी बोली अवधि में मांग कैसे विकसित हुई।

इश्यू बंद होने के बाद अगले अहम चरणों में आवंटन का आधार तय करना, जहां लागू हो वहां रिफंड की प्रक्रिया, सफल आवेदकों के खातों में शेयर जमा करना और प्रस्तावित शेयर बाजार लिस्टिंग की तैयारी शामिल हैं।

निवेशकों को सब्सक्रिप्शन मांग और निवेश प्रदर्शन के बीच अंतर समझना चाहिए। ओवरसब्सक्राइब हुआ आईपीओ बताता है कि किसी श्रेणी में आवेदन उपलब्ध शेयरों से ज्यादा हैं, लेकिन यह तय नहीं करता कि लिस्टिंग के बाद शेयर किस भाव पर कारोबार करेगा।

जियो प्लेटफॉर्म्स के दूसरे दिन के सब्सक्रिप्शन आंकड़े निवेशकों की सभी श्रेणियों में मजबूत मांग दिखाते हैं, जबकि एंकर बुक सार्वजनिक पेशकश शुरू होने से पहले ही भारी दिलचस्पी को दर्शाती है। बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़े और आधिकारिक एक्सचेंज खुलासे तस्वीर को अधिक स्पष्ट करेंगे।

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में उसके पैमाने और स्थिति ने इस आईपीओ को घरेलू प्राइमरी बाजार के लिए एक अहम घटना बना दिया है।