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निर्मला सीतारमण ने दिल्ली में RBI गवर्नर और वित्तीय नियामकों के साथ FSDC की 30वीं बैठक की अध्यक्षता की
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निर्मला सीतारमण ने दिल्ली में RBI गवर्नर और वित्तीय नियामकों के साथ FSDC की 30वीं बैठक की अध्यक्षता की

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बैठक में शामिल हुए वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी बैठक में RBI गवर्नर और प्रमुख वित्तीय नियामक संस्थाओं के अध्यक्ष शामिल हुए, जिनमें भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI), अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) और भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) शामिल हैं।

निर्मला सीतारमण ने दिल्ली में RBI गवर्नर और वित्तीय नियामकों के साथ FSDC की 30वीं बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC) की 30वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर, प्रमुख वित्तीय क्षेत्र नियामकों के प्रमुख और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भारत की वित्तीय प्रणाली से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए जुटे।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, बैठक में कई सरकारी विभागों और नियामक संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रतिभागियों में बैंकिंग, पूंजी बाजार, बीमा, पेंशन और वित्तीय विनियमन के अन्य क्षेत्रों के लिए जिम्मेदार अधिकारी शामिल थे।

बैठक में शामिल हुए वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी

बैठक में RBI गवर्नर और प्रमुख वित्तीय नियामक संस्थाओं के अध्यक्ष शामिल हुए, जिनमें भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI), अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) और भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) शामिल हैं।

आर्थिक मामलों के विभाग, राजस्व विभाग और वित्तीय सेवा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

इन संस्थाओं की भागीदारी स्थिर वित्तीय प्रणाली बनाए रखने से जुड़ी व्यापक जिम्मेदारियों को दर्शाती है। अलग-अलग नियामक क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों की निगरानी करते हैं, इसलिए जब वित्तीय जोखिम या नियामकीय मुद्दे कई क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं तो समन्वय अहम हो जाता है।

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद क्या है?

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद वित्तीय स्थिरता और वित्तीय क्षेत्र के विकास पर चर्चा के लिए भारत का सर्वोच्च स्तर का मंच है। सरकार द्वारा 2010 में स्थापित यह परिषद वित्तीय नियामकों और संबंधित सरकारी विभागों के बीच समन्वय का मंच उपलब्ध कराती है।

परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं, जबकि इसके सदस्यों में RBI गवर्नर, वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख वित्तीय नियामक प्राधिकरणों के प्रमुख शामिल हैं।

FSDC की जिम्मेदारियां वित्तीय स्थिरता की निगरानी से आगे तक जाती हैं। इसके दायरे में वित्तीय समावेशन, वित्तीय साक्षरता, मैक्रोप्रूडेंशियल पर्यवेक्षण और व्यापक वित्तीय क्षेत्र को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर समन्वय शामिल है।

परिषद बड़े वित्तीय समूहों से जुड़े मामलों और इस बात पर भी विचार करती है कि वित्तीय प्रणाली के एक हिस्से में होने वाले घटनाक्रम दूसरे संस्थानों या बाजारों के लिए क्या जोखिम पैदा कर सकते हैं।

नियामकों के बीच समन्वय क्यों मायने रखता है

भारत की वित्तीय प्रणाली में बैंक, प्रतिभूति बाजार, बीमा प्रदाता, पेंशन संस्थान और अन्य वित्तीय संगठन शामिल हैं। ये क्षेत्र अलग-अलग नियामकीय ढांचों के तहत काम करते हैं, लेकिन उनकी गतिविधियां आपस में करीब से जुड़ी हो सकती हैं।

नियामकों के बीच समन्वय से प्राधिकरणों को उभरते जोखिमों की पहचान करने, जानकारी साझा करने और साझा चुनौतियों पर एकरूप नजरिया अपनाने पर विचार करने में मदद मिलती है। यह वित्तीय क्षेत्र की नीतियों को लागू करने में भी सहायक हो सकता है और प्रणाली में भरोसा मजबूत करने में मदद कर सकता है।

FSDC वरिष्ठ नीति-निर्माताओं और नियामकों को इन मुद्दों पर सामूहिक रूप से चर्चा करने का मंच देती है। RBI गवर्नर की अध्यक्षता वाली एक उप-समिति भी वित्तीय स्थिरता और नियामकीय समन्वय के मामलों की जांच करती है और संबंधित फैसलों पर अनुवर्ती कार्रवाई करती है।

वित्तीय स्थिरता और विकास पर फोकस

वित्तीय स्थिरता जनता का भरोसा बनाए रखने, निवेश को समर्थन देने और यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों में भी वित्तीय संस्थान सेवाएं देते रहें। जब घरेलू या अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम बाजारों और संस्थानों के लिए नए जोखिम पैदा करते हैं, तब नियामकीय समन्वय खास तौर पर प्रासंगिक हो जाता है।

परिषद के व्यापक दायरे में वित्तीय समावेशन और साक्षरता को बढ़ावा देना भी शामिल है, ताकि अधिक लोग वित्तीय सेवाओं को समझ सकें और उन तक पहुंच सकें। इसकी चर्चाओं में सदस्यों द्वारा रखे गए वे मुद्दे भी आ सकते हैं जो भारत के वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता और विकास से जुड़े हैं।

30वीं बैठक का महत्व

30वीं FSDC बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री के नेतृत्व में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और वित्तीय नियामक एक साथ आए। उनकी भागीदारी ने भारत की वित्तीय प्रणाली के अलग-अलग हिस्सों की निगरानी करने वाले संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।

अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के विकसित होने के साथ यह परिषद जोखिमों पर चर्चा करने, नियामकीय समन्वय बेहतर बनाने और वित्तीय क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को समर्थन देने का एक अहम मंच बनी हुई है।

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।